CTC से इन-हैंड सैलरी कैसे निकलती है
नौकरी के ऑफ़र में सैलरी अक्सर CTC (कॉस्ट टू कंपनी) के रूप में बताई जाती है। इसमें वह पैसा भी शामिल होता है जो आपको हर महीने नहीं मिलता:
- एम्प्लॉयर का PF: बेसिक सैलरी का 12%, जो सीधे आपके PF खाते में जाता है।
- ग्रेच्युटी: बेसिक का लगभग 4.81%, जो 5 साल की नौकरी के बाद मिलती है।
इन्हें घटाने पर ग्रॉस सैलरी बचती है। फिर उसमें से आपका अपना PF (बेसिक का 12%), प्रोफ़ेशनल टैक्स और इनकम टैक्स कटता है, और बाकी आपकी इन-हैंड सैलरी है।
नई टैक्स व्यवस्था, वित्त वर्ष 2026-27
- ₹4 लाख तक: 0% · ₹4–8 लाख: 5% · ₹8–12 लाख: 10% · ₹12–16 लाख: 15% · ₹16–20 लाख: 20% · ₹20–24 लाख: 25% · ₹24 लाख से ऊपर: 30%
- नौकरीपेशा लोगों के लिए ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन।
- धारा 87A के तहत ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आय पर टैक्स शून्य, यानी ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर कोई टैक्स नहीं।
- टैक्स पर 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस।
लोकप्रिय CTC पर इन-हैंड सैलरी
| सालाना CTC | इनकम टैक्स | सालाना इन-हैंड | मासिक इन-हैंड |
|---|---|---|---|
| ₹6,00,000 | ₹0 | ₹5,11,070 | ₹42,589 |
| ₹10,00,000 | ₹0 | ₹8,53,450 | ₹71,121 |
| ₹12,00,000 | ₹0 | ₹10,24,640 | ₹85,387 |
| ₹15,00,000 | ₹77,442 | ₹12,03,983 | ₹1,00,332 |
| ₹20,00,000 | ₹1,56,915 | ₹15,52,485 | ₹1,29,374 |
| ₹30,00,000 | ₹3,96,349 | ₹21,69,001 | ₹1,80,750 |
| ₹50,00,000 | ₹9,67,902 | ₹33,09,348 | ₹2,75,779 |
बेसिक CTC का 50%, पूरे बेसिक पर PF, CTC में ग्रेच्युटी शामिल, प्रोफ़ेशनल टैक्स ₹2,500 सालाना। ऊपर के कैलकुलेटर में ये सब बदल सकते हैं।
इन-हैंड सैलरी बढ़ाने के तरीके
- अगर कंपनी अनुमति दे, तो PF सिर्फ़ ₹15,000 के बेसिक पर कटवाने से हर महीने ज़्यादा पैसा हाथ में आता है, हालाँकि रिटायरमेंट बचत कम होती है।
- नई टैक्स व्यवस्था में ज़्यादातर छूटें (HRA, 80C) नहीं मिलतीं; अगर आपकी HRA और निवेश की कटौतियाँ बड़ी हैं, तो पुरानी व्यवस्था से तुलना करें।
- एम्प्लॉयर का NPS योगदान (बेसिक का 14% तक) नई व्यवस्था में भी टैक्स-फ़्री है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
12 लाख CTC पर इन-हैंड सैलरी कितनी होगी?
बेसिक 50%, पूरे बेसिक पर PF, ग्रेच्युटी CTC में शामिल और ₹2,500 प्रोफ़ेशनल टैक्स मानकर, नई टैक्स व्यवस्था में कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा और हर महीने लगभग ₹85,387 हाथ में आएँगे।
क्या 12 लाख तक की सैलरी पर टैक्स नहीं लगता?
नई टैक्स व्यवस्था में ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आय पर 87A रिबेट से टैक्स शून्य हो जाता है। ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के कारण ₹12.75 लाख तक की सैलरी टैक्स-फ़्री है।
CTC और ग्रॉस सैलरी में क्या अंतर है?
CTC में एम्प्लॉयर का PF और ग्रेच्युटी जैसे हिस्से भी शामिल होते हैं। इन्हें घटाने पर ग्रॉस सैलरी मिलती है, और ग्रॉस में से टैक्स और आपका PF कटने के बाद इन-हैंड सैलरी।
प्रोफ़ेशनल टैक्स कितना होता है?
यह राज्य पर निर्भर है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सालाना लगभग ₹2,400–2,500 लगता है, जबकि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों में यह नहीं लगता।
यह अनुमान है; आपकी सैलरी स्लिप में HRA, अलाउंस, बोनस या दूसरी कटौतियों के कारण अंतर हो सकता है।